वेद पाल(मृत्यु)
वेदपाल वर्मा🎂❓⚰️19 दिसम्बर, 1996 आज अधिकांश लोग वेदपाल वर्मा का नाम भी नहीं जानते होंगे, लेकिन एक ज़माना था जब उन्होंने फ़िल्म संगीत को कुछ दिलकश धुनें दी थीं। सिरसा (हरियाणा) के आर्यसमाजी परिवार में जन्मे वेदपाल वर्मा को बचपन में पिता अकसर भजन सुनाने मंदिर में ले जाते थे। संगीत के मूल तत्व उन्हें यहीं से प्राप्त हुए। बाद में संगीत की शिक्षा ली, कुछ दिनों तक मैकेनिक भी रहे, फिर ऑल इंडिया रेडियो में संगीतकार बने और मोतीराम जी तथा जीतूराम जी जैसे संगीतज्ञों से सीखते भी रहे। उनके काम से प्रभावित होकर एस.एस. ओबेराॅय और गीतकार मधुकर ने उन्हें बम्बई में काम का न्योता दिया। छठे दशक में अन्य कई संगीतकारों की तरह वे बम्बई गायक बनने चले गए। संघर्ष करते रहे, पर उन्हें सही अवसर नहीं मिला। तभी एक बार गीतकार रमेश शास्त्री ने निर्माता राधेश्याम झुनझुनवाला और निर्देशक सत्येन बोस की 'परिचय' (1954) में शैलेष के साथ संगीतकार के रूप में काम दिलवाया। इस फ़िल्म में वेदपाल ने 'मेरा घोड़ा बड़ा है निगोड़ा' (किशोर), 'देखा जो बालमा ने मेरी तरफ' (शमशाद) और 'मैं जनम जनम से हूं दुखिया' (आ...